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सोशल डिस्टेंसिंग से छोटे कारोबार को सबसे ज्यादा नुकसान, पूरी तरह से ऑफलाइन खरीदारी पर निर्भर होने से बढ़ी मुसीबत

नई दिल्ली. भारत में सफल कारोबारी बनने के लिए बातचीत में माहिर होना जरूरी माना जाता है। शायद यही वजह है कि इंटरनेट, मोबाइल के साथ तेजी से कम्यूनिकेशन तकनीक के विस्तार के बावजूद आज भी लोग दुकान, मॉल या फिर शोरूम जाकर खरीदारी करना पसंद करते हैं। लेकिन कोरोनावायरस की वजह से लोग सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी बनाए हुए हैं। इसकी वजह से ऑफलाइन खरीदारी पूरी तरह से बंद हो गई है। यहां छोटे दुकानदार पूरी तरह से ऑफलाइन खरीदारी पर निर्भर हैं। भारत में कम पूंजी लगाकर कारोबार शुरू करने वाले कारोबारी सामान के आर्डर, डिलीवरी, और स्टॉक पर अतिरिक्त पैसे खर्च करने से बचते हैं। इसकी बयाज छोटे कारोबार ऑफलाइन ब्रिक्री करना बेहतर समझते हैं, जिसमें आर्डर डिलीवरी और स्टॉक के लिए अतिरिक्त स्टॉफ और सर्विस की जरूरत नहीं होती है।

छोटे कारोबार से जुड़ा बड़ा मजदूर वर्ग
भारत में पर्सनल सर्विस, पर्सनल केयर और होम केयर सेक्टर ऐसा है, जिससे सबसे ज्यादा मजदूर वर्ग जुड़ा है। पर्सनल केयर के तहत बाल काटने वाले, ब्यूटी पार्लर, सैलून और मेडिकल लाइन से जुड़े लोग आते हैं। वहीं होम केयर के तहर घर, होटल और रेस्तरां में काम करने वाले साफ-सफाई समेत सिक्योरिटी गार्ड जैसा बड़ा मजदूर वर्ग शामिल है। भारत में इस सेक्टर से जुड़े लोगों का सरकार के पास कोई वास्तविक आंकड़ा नहीं है। भारत की कुल वर्कफोर्स में से 93 फीसदी यानी करीब 400 मिलियन लोग मुख्त तौर पर अस्थायी सेक्टर से आते हैं जबकि करीब 93 मिलियन लोगों को सीजनल रोजगार मिलता है। इस सभी कामगारों को कोरोनावायरस की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल के मुताबिक भारत के अस्थायी रोजगार की बात करें, तो 75 फीसदी लोग स्वरोजगार हैं। यानी रिक्शा, कारपेंटर, पलंबर जैसे काम करते हैं। इन कामगारों को पेड लीव, मेडिकल जैसी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता है।

MSME सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर
रिसर्चर राकेश के शुक्ला की मानें, तो कोरोनावायरसस की वजह से दिहाड़ी मजदूरों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। शहरी इलाकों में करीब 25 से 30 फीसदी लोग दिहाड़ी पर मजदूरी करते हैं। देश की करीब 75 मिलियन एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ की इंजन हैं, जो करीब 180 मिलियन नौकरी पैदा करती हैं। साथ ही करीब 1183 बिलियन डॉलर के हिसाब से अर्थव्यवस्था को रफ्तार देती है। इसमें से केवल 7 मिलियन एमएसएमई ही रजिस्टर्ड हैं।

ऑनलाइन खरीदारी में कोरोनावायरस से बढ़ोतरी
कोरोनावायरस की वजह से मजबूरी में ही सही, लेकिन लोग ऑनलाइन शॉपिंग को अपना रहे हैं। इससे आने वाले दिनों में भारतीयों की खरीदारी पर असर पड़ना वाजिब है। वीकेंड पर मॉल, सुपर मार्केट और रिटेल शॉप पर जाकर खरीदारी करने वाले आज ऑनलाइन ग्रॉसरी आइटम आर्डर कर रहे हैं। रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) के मुताबिक भारत में मॉडर्न रिटेल सेक्टर में करीब 60 लाख कर्मचारी काम करते हैं। इसमें से करीब 40 फीसदी यानी 24 लाख लोगो की नौकरी अगले 4 माह में कोरोनावायरस से जा सकती है। दरअसल 31 मार्च तक देशभर के ज्यादातर मॉल, सुपर मार्केट और अन्य मॉडर्न रिटेल शॉप को बंद कर दिया गया है।

रिटेल सेक्टर की कमाई में 90 फीसदी की गिरावट
RAI के चीफ एक्जीक्यूटिव कुमार राजगोपालन ने कहा कि अगले 6 माह में रिटेल सेक्टर की कमाई 90 फीसदी तक घट सकती है। इसके चलते आरएआई ने सरकार से रिटेल सेक्टर के लिए राहत पैकेज की मांग की है। साथ ही राजगोपालन ने रिटेल सेक्टर के लिए कर्ज अदायगी में छूट और जीएसटी और अन्य करों में छूट का प्रस्ताव दिया है। RAI भारत के करीब 5 लाख स्टोर का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें वी-मार्ट, शॉपर्स स्टॉप, फ्यूचर ग्रुप और एवेन्यू सुपरमार्ट्स शामिल हैं, जिसे ग्रॉसरी चेन डी-मार्ट ऑपरेट करता है।

265 में से 116 रिटेल स्टोर बंद
हाइपरमार्केट बिग बाजार के ओनर फ्यूचर रिटेल ओनर्स ने कहा कोरोनावायरस की वजह से रेवेन्यू में गिरावट दर्ज की गई है। भारत में कोरोनावायरस के 341 मामले दर्ज किए गए है। देशभर में अब तक सात मौतें हो गई है। गुरुग्राम बेस्ड फैशन रिटेलर वी-मार्ट ने कहा कि 5 से 21 मार्च के दौरान रिटेल सेक्टर के रेवेन्यू में 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। देशभर में शनिवार तक 265 में से 116 रिटेल बंद हो कर दिए गए हैं।

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Smaller business suffer the most due to social distancing, increased trouble due to relying solely on offline shopping

Source: bhaskar.com

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