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जीडीपी ग्रोथ रेट मार्च तिमाही में 5.8%, पूरे वित्त वर्ष में 6.8%; प्रति व्यक्ति आय में 10% बढ़ोतरी

  • इससे पहले 2013-14 में विकास दर 6.4% दर्ज की गई थी
  • एग्रीकल्चर-मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के खराब प्रदर्शन गिरावट आई
  • 2018 की मार्च तिमाही में ग्रोथ 8.1%, वित्त वर्ष 2017-18 में 7.2% थी

नई दिल्ली. बीते वित्त वर्ष (2018-19) की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में जीडीपी ग्रोथ रेट 5.8% रही। एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के खराब प्रदर्शन की वजह से विकास दर में गिरावट आई है। सांख्यिकी विभाग ने शुक्रवार को विकास दर के आंकड़े जारी किए हैं। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में विकास दर 6.6% थी। भारत की तिमाही जीडीपी ग्रोथ अब दुनिया में सबसे तेज नहीं रही क्योंकि जनवरी-मार्च तिमाही में चीन की ग्रोथ 6.4% रही थी। वहीं, वित्त वर्ष 2018-19 में देश की प्रति व्यक्ति आय में 10% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

तिमाही ग्रोथ में कमी का असर पूरे वित्त वर्ष की विकास दर पर पड़ा है। यह 6.8% रही है जो 5 साल में सबसे कम है। इससे पहले 2013-14 में विकास दर 6.4% दर्ज की गई थी।

तिमाही  जनवरी-मार्च 2019 अक्टूबर दिसंबर 2018 जनवरी मार्च 2018
जीडीपी ग्रोथ 5.8% 6.6% 8.1%
वित्त वर्ष 2018-19 2017-18 2013-14
जीडीपी ग्रोथ 6.8% 7.2%

6.4%

केंद्रीय सांख्यिकी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक ग्रॉस वैल्यू एडिशन (जीवीए) पिछले साल की मार्च तिमाही के 7.9% के मुकाबले 5.7% बढ़ा है। जीडीपी में से टैक्स घटाने पर जीवीए का आंकड़ा निकलता है।

सेक्टर जनवरी-मार्च 2019 में ग्रोथ जनवरी-मार्च 2018 में ग्रोथ
एग्रीकल्चर, फोरेस्ट्री, फिशिंग -0.1% 6.5%
मैन्युफैक्चरिंग 3.1% 9.5%
फाइनेंशियल, रिएल एस्टेट, प्रोफेशनल सर्विसेज 9.5% 5.5%

सरकार ने कहा- अप्रैल-जून में भी घट सकती है विकास दर
आर्थिक मामलों के सचिव एस सी गर्ग का कहना है कि नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल सेक्टर की दिक्कतों जैसी अस्थाई वजहों से चौथी तिमाही की विकास दर में कमी आई है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भी धीमापन रह सकता है। दूसरी तिमाही से इकोनॉमी में तेजी आएगी।

अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए आरबीआई ब्याज दरें 0.50% तक घटा सकता है: रिपोर्ट
एसबीआई की सोमवार को जारी ईकोरैप रिपोर्ट में पहले ही कहा गया था कि पूरे वित्त वर्ष की जीडीपी ग्रोथ 7% से नीचे जा सकती है। इससे आरबीआई अगली समीक्षा बैठक (जून) में ब्याज दरों में 0.50% तक कटौती करने को मजबूर हो सकता है ताकि कर्ज सस्ता हो और खपत बढ़ने से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिल सके।

प्रति व्यक्ति आय 10,553 रु./माह हुई
2018-19 के दौरान प्रति व्यक्ति आय में 10% की बढ़ोतरी हुई। यह सालाना 1,26,406 रु. हो गई यानी 10,553 रु. मासिक। 2017-18 में यह 1,14,958 सालाना यानी 9,557 रु. मासिक थी। 2018-19 में सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) 188.17 लाख करोड़ रु. रही। इसमें 11.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2017-18 में यह 169.10 लाख करोड़ थी।

Source: bhaskar.com

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