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जो गांव खुले में शौच से मुक्त नहीं हुए, वहां भूजल 12.7% ज्यादा प्रदूषित: यूनीसेफ

  • यूनीसेफ ने बिहार, बंगाल और ओडिशा के गांवों से भूजल के 752 सैंपल लिए
  • जो गांव खुले में शौच मुक्त नहीं हुए, वहां की मिट्टी में 1.13% और पेयजल में 2.68% ज्यादा प्रदूषण

नई दिल्ली. मोदी सरकार के स्वच्छ भारत मिशन से भूजल प्रदूषण में कमी आई है। यह बात यूनीसेफ की एक स्टडी में सामने आई। अध्ययन के मुताबिक, खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित हो चुके गांवों के मुकाबले नॉन ओडीएफ गांवों में भूजल 12.7% ज्यादा प्रदूषित मिला। इसके अलावा मिट्टी में 1.13%, खाने-पीने की वस्तुओं में 1.48% और पीने के पानी में 2.68% ज्यादा प्रदूषण सामने आया।

विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर बुधवार को जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) को लेकर यूनीसेफ और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की रिपोर्ट रिलीज की। यूनीसेफ ने इस प्रोजेक्ट को एन्वायरमेंटल इम्पैक्ट ऑफ द स्वच्छ भारत मिशन ऑन वॉटर, सॉइल एंड फूड नाम दिया है। इसके तहत बिहार, बंगाल और ओडिशा में ओडीएफ और नॉन ओडीएफ गांवों से भूजल के 12-12 सैंपल लिए गए।

अब स्वच्छ पेयजल पर फोकस करेगी सरकार 
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांवों के खुले में शौच मुक्त होने से स्वच्छता के साथ पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार आया है। पिछले साल हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक अध्ययन के मुताबिक, स्वच्छ भारत मिशन की वजह से तीन लाख लोगों की जान बच गई। नए मंत्रालय के तहत सरकार अब गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने पर काम करेगी। इसके लिए घर-घर नल से जल योजना लाई जा सकती है।

देश के 5 लाख 62 हजार से ज्यादा गांव ओडीएफ घोषित
स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्र सरकार ने गांवों में शौचालयों का निर्माण कराया है। देश के करीब 5 लाख 62 हजार गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके हैं। आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम और अंडमान निकोबार 100% ओडीएफ घोषित हो चुके हैं। जबकि बिहार, बंगाल, ओडिशा, तेलंगाना और गोवा इस मामले में पीछे हैं।

Source: bhaskar.com

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