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पुलवामा हमले के बाद CRPF के काफिले को लेकर हुआ बदलाव, एसपी निगरानी में होगी यात्रा

Publish Date:Sun, 31 Mar 2019 10:10 PM (IST)

नई दिल्ली, प्रेट्र। कश्मीर घाटी में आने-जाने वाला सीआरपीएफ का हर काफिला अब 40 वाहनों से अधिक का नहीं होगा। साथ ही इस अर्धसैनिक बल के काफिले की अगुआई अब एसपी रैंक का अधिकारी ही करेगा। सीआरपीएफ ने यह फैसला पुलवामा आतंकी हमले के मद्देनजर किया है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सीआरपीएफ के दिल्ली स्थित मुख्यालय ने अर्धसैनिक बल के अभियानों की नई मानक प्रक्रियाएं (एसओपी) जारी करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबल के वाहनों के काफिले राज्य के बाहर या अंदर आने-जाने के समय नए दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे।

काफिले में प्रत्येक वाहन के यात्रियों के लिए भी अनुशासन की नियमावली का सख्ती से पालन करने को कहा गया है। एसपी की रैंक के बराबर का सेकंड इन कमांड अफसर अब काफिले का नेतृत्व करेगा। पहले जूनियर एसिस्टेंट कमांडेंट रैंक (एसिस्टेंट एसपी) ही काफिले की अगुआई करते थे।

यह बदलाव इसलिए किया गया ताकि अधिक वरिष्ठ और अनुभवी अफसर हालात की बेहतर समझ रखता हो और कश्मीर घाटी से काफिले को ले आने या ले जाने के समय बेहतर रणनीति का इस्तेमाल कर सके।

इससे अर्धसैनिक बल में जवाबदेही का क्रम भी बेहतर होगा। अब से काफिले का नया कमांडर सीधे कश्मीर में सीआरपीएफ के तीन डीआइजी (ऑपरेशंस) में से एक को रिपोर्ट करेगा और उनसे ही समन्वय करेगा। अब तक काफिले का कमांडर या एसिस्टेंट कमांडेंट अपने उच्चाधिकारियों से केवल कमांडेंट के मार्फत ही बात कर सकता था।

सशस्त्र बलों के काफिले के साथ चलने वाला कमांडर अक्सर ऐसे वाहन से चलता है, जिसमें संचार के सभी उपकरण लगे होते हैं, ताकि वह जरूरत पड़ने पर जल्द से जल्द संपर्क स्थापित कर सके। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार यह भी फैसला किया गया है कि किसी भी सूरत में काफिले में वाहनों की संख्या 40 से अधिक नहीं होगी। बल्कि प्रभावशाली प्रबंधन और नियंत्रण के लिए वाहनों के किसी भी काफिले में वाहनों की तादाद दस से बीच ही रखी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि विगत 14 फरवरी को पुलवामा में जम्मू-कश्मीर हाईवे पर सीआरपीएफ के 78 वाहनों के काफिले में पांचवीं बस पर आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने हमला किया था। विस्फोटकों से लदी एक एसयूवी आकर इस बस से टकरा गई थी जिसके बाद हुए विस्फोट में 40 जवान शहीद हो गए थे। उनके पार्थिव शरीर इतने छिन्न-भिन्न हो गए थे कि उनकी पहचान भी बहुत मुश्किल से हो पाई।

सूत्रों के मुताबिक इसीलिए सीआरपीएफ ने अपने जवानों के बसों में बैठने के पूर्व निर्धारित स्थान में कोई तब्दीली किसी भी सूरत में न करने की हिदायत दी है। साथ ही कहा कि चाय-नाश्ते के ब्रेक के बाद भी बस या ट्रक में वापस तयशुदा स्थान पर ही आकर बैठना होगा।

बुलेटप्रूफ मोबाइल बंकर भी रखेंगे
इन काफिलों में अब से बुलेटप्रूफ मोबाइल बंकर भी रखे जाएंगे। हमला होने की सूरत या आशंका पर बचाव या हमले के लिए प्राय: इन मोबाइल बंकरों का इस्तेमाल किया जाता है। प्रत्येक वाहन में एक सशस्त्र सुरक्षा अधिकारी तैनात होगा। लेकिन सैन्य अभियान की जरूरत के मुताबिक समय-समय पर उनकी ड्यूटी और तादात बदलती रहा करेगी।

उधमपुर में बनेगा विशेष मार्ग
सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा बलों के लिए ही इस्तेमाल होने वाला उधमपुर में एक विशेष मार्ग तैयार किया जाना है। इससे जम्मू और कश्मीर के बीच का फासला 70 किलोमीटर कम हो जाएगा। काफिलों के लिए मौजूदा पड़ाव जम्मू में है और इन स्थानों पर आवाजाही के लिए काफिलों को दस से बारह घंटे का सफर कर 300 किमी का रास्ता तय करना होता है। लेकिन उधमपुर में भी पड़ाव या शिविर बन जाने से समय तो बचेगा ही काफिलों को ले जाने के दौरान आतंकी हमले का खतरा भी कम हो जाएगा। चूंकि सरकार सभी जवानों को श्रीनगर से जम्मू या दिल्ली विमान से भेजेगी तो भी आतंकी खतरा तब तक बना रहेगा जब तक कि उधमपुर का ट्रांजिक कैंप शुरू नहीं हो जाता।

Posted By: Prateek Kumar

Source: Jagran.com

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