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नलिनी 27 साल में दूसरी बार जेल में बाहर आई, बेटी की शादी के लिए मिली थी एक महीने की पैरोल

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  • Rajiv Gandhi assassination convict Nalini Sriharan released for 30 days parole 

  • मद्रास हाईकोर्ट ने 5 जुलाई को नलिनी की पैरोल अर्जी मंजूर की, उसने 6 महीने की पैरोल मांगी थी
  • पिछले साल पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भी नलिनी एक दिन के बाहर आई थी
  • एस नलिनी और उसका पति 27 साल से जेल में बंद हैं, बेटी का जन्म भी जेल में ही हुआ था

Dainik Bhaskar

Jul 25, 2019, 11:22 AM IST

चेन्नई. राजीव गांधी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रही एस नलिनी को गुरुवार को एक महीने की पैरोल पर वैल्लोर सेंट्रल जेल से बाहर आई। नलिनी राजीव गांधी हत्या मामले के सात दोषियों में शामिल है। इससे पहले पिछले साल पिता की मौत के बाद वह जेल से बाहर आई थी। नलिनी ने बेटी की शादी की तैयारी के लिए छह महीने की पैरोल की मांग की थी। लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने 5 जुलाई को 30 दिन पैरोल की अर्जी ही मंजूर की थी। उसकी बेटी ब्रिटेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।

नलिनी ने छह महीने की पैरोल मांगी थी

  1. पिछले महीने जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एम निर्मल कुमार की बेंच ने पैरोल अर्जी पर सुनवाई की थी। तमिलनाडु सरकार ने कहा था कि उसे एक बार में अधिकतम एक महीना की पैरोल ही दी जानी चाहिए। नलिनी ने छह महीने की पैरोल मांगी थी। कहा था कि शादी की तैयारी के लिए एक महीना काफी नहीं होगा।

  2. नलिनी को इंटरव्यू देने की इजाजत नहीं

    कोर्ट ने नलिनी को बाहर जाने के बाद कोई भी साक्षात्कार देने और किसी नेता से मिलने से मना किया है। उसे कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया था। 25 जून को कोर्ट ने नलिनी की याचिका पर सुनवाई की मंजूरी दी थी।

  3. 1991 में हुई राजीव गांधी की हत्या

    नलिनी वैल्लोर में 27 साल से जेल में बंद है। उसकी बेटी का जन्म भी जेल में ही हुआ था। उसके साथ ही छह अन्य दोषी भी जेल में बंद हैं। इसमें उसका पति मुरुगन भी शामिल है। तमिलनाडु के श्रीपेरमबुदूर में एक चुनावी रैली के दौरान 21 मई 1991 में लिट्टे के आत्मघाती हमले में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या हुई थी। 

  4. मौत की सजा को राज्य सरकार ने उम्रकैद में बदला

    अप्रैल में नलिनी ने मद्रास हाईकोर्ट में अपील की थी कि उसे अपनी बात रखने का मौका दिया जाए। नलिनी को राजीव गांधी हत्याकांड के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन तमिलनाडु सरकार ने 24 अप्रैल 2000 को इसे उम्रकैद में बदल दिया।

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Source: bhaskar.com

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