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दिल्ली की सड़कों पर 4 से 15 नवंबर के बीच फिर से ऑड-ईवन फॉर्मूला, छुट्टी के दिन छूट मिलेगी

नई दिल्ली. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि इस बार फिर से प्रदूषण नियंत्रित रखने के लिए 4 से 15 नवंबर तक ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू होगा। छुट्टी के दिन इसमें छूट मिलेगी। वहीं,हर वार्ड में कचरा जलाने से रोकने के लिए दो-दो एन्वायरमेंट मार्शल तैनात किए जाएंगे।पेड़ लगाने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर जारी करेंगे। प्रदूषण से निपटने के लिए 7 प्वाइंट का एक्शन प्लान तैयार किया गया है।

केजरीवाल ने यह भी कहा कि 15 नवंबर के बाद जब पराली का प्रदूषण कम हो जाएगा,तब दो प्लान (दिवाली और ऑड-ईवन) हटाए जाएंगे। इसके बाद दिल्ली में विंटर एक्शन प्लान लागू रहेगा। दिल्ली के लोगों कोमास्क बांटे जाएंगे।दिल्ली सरकार ने जनवरी 2016 और अप्रैल 2016 में ऑड-ईवन व्यवस्था लागू की थी।राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कुल प्रदूषण में 25% से 30% हिस्सा वाहनों से निकलने वाले धुएं का है।

‘इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी लाएंगे’
केजरीवाल ने कहा, ‘‘दिल्ली में सरकारी बसों के रूट में बदलाव करके फ्रिक्वेंसी बढ़ाई जाएगी। नई बसें आएंगी। इससे सड़कों पर वाहनों का दवाब कम होगा। बस स्टैंड को मॉडर्न बनाया जाएगा। इन पर पता चलेगा कि बस कितनी देर में आएगी। जैसा कि मेट्रो में होता है। इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी अपनाई जाएगी। 2021 तक जो नई बसें आएंगी, वे सभी इलेक्ट्रिक होंगी।’’

नए ट्रैफिक नियमों के तहत चालान पर केजरीवाल ने कहा, ‘‘सब चाहते हैं कि ट्रैकिक सुधरे। इससे कई लोगों की जान जाती हैं। पॉल्यूशन सेंटर्स पर लंबी लाइनें लग रही हैं। हम नए नियमों की समीक्षा कर रहे हैं। अगर लोगों को कोई परेशानी हो रही है, तो सुधार करेंगे। एक बात तो साफ है कि नए नियमों से ट्रैफिक में सुधार आया है। पिछले दो ऑड-ईवन से हमें जो सीख मिली है। उसे इस बार शामिल किया जाएगा।’’

ऑड और ईवन नंबर के मायने
ईवन नंबर: जिन गाड़ियों के आखिरी नंबर में 0, 2, 4, 6, 8 जैसे डिजिट होंगे।
ऑड नंबर: जिन गाड़ियों के आखिरी नंबर में 1, 3, 5, 7, 9 जैसे डिजिट होंगे।
तय दिनों पर एक दिन ऑड और एक दिन ईवन की नंबर की गाड़ियों को ही सड़कों पर चलाने की इजाजत होगी। इमरजेंसी सर्विसेस या वीवीआईपी गाड़ियों को इससे छूट दी जाएगी।

दिल्ली में किस वजह से कितना प्रदूषण?
पीएम 2.5
गाड़ियों के धुएं से बढ़ता है पीएम 2.5 : 25% से 30%
आईआईटी कानपुर की जनवरी 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में वाहनों से 25% से 30% तक प्रदूषण होता है। ये प्रदूषित कण वातावरण में फैलकर पीएम 2.5 जैसे जानलेवा प्रदूषित कणों को बढ़ातेहैं।

कोयले व धुएं की राख से प्रदूषण : 5%
दिल्ली में रेस्टोरेंट, फैक्ट्री, इंडस्ट्रियल एरिया में कोयले का इस्तेमाल भी किया जाता है। प्लास्टिक हो या कोई भी मटेरियल, इनसे जो राख बचती है, उससे उड़ने वाला धुआं पीएम 2.5 के स्तर को 5% तक बढ़ा देता है।

इंडस्ट्रियां बढ़ाती हैं सेकंडरी पॉल्यूटेंट्स : 30%
एक्सपर्ट का कहना है कि नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड जैसे अन्य प्रदूषित कणवातावरण में फैल रहे हैं। इन्हें इंडस्ट्रीज व फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं को बढ़ातेहैं, जो 30% है।

कचरा जलने से फैलने वाला प्रदूषण : 8%
गाजीपुर, ओखला और भलस्वा लैंडफिल साइटों में अक्सर कूड़ा जल जाता है। दिल्ली के वातावरण में इसका योगदान पीएम 2.5 के स्तर को बढ़ाने में 8% प्रतिशत है।

पराली से होने वाला पॉल्यूशन : 26%
प्रदूषण का दूसरा बड़ा फैक्टर पराली है, जिससे प्रदूषण का स्तर भयावह स्थिति में पहुंच जाता है। पीएम 2.5 को बढ़ाने में पराली का 26% तक योगदान है।

रोड डस्ट और कंस्ट्रक्शन से होने वाला प्रदूषण : 6%
आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट के अनुसार, पीएम 2.5 का लेवल बढ़ाने में रोड डस्ट और कंस्ट्रक्शन से फैलने वाले प्रदूषण का योगदान 6% तक है।

पीएम 10
रोड डस्ट और कंस्ट्रक्शन : 56%
आबोहवा में सबसे ज्यादा पीएम 10 रोड डस्ट और कंस्ट्रक्शन साइटों से बढ़ता है। इनसे स्तर56% तक बढ़ जाता है।

इंडस्ट्री और फैक्ट्रियों का धुआं : 20%
प्रदूषण फैलाने में फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रीज का काफी योगदान है। यह पीएम 10 का स्तर 20%तक बढ़ाता है।

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Source: bhaskar.com

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