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सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी और पांच बच्चों की हत्या के दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदला

Publish Date:Sun, 24 Feb 2019 09:53 PM (IST)

नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिका पर फैसले में देरी का हवाला देते हुए पत्नी और पांच बच्चों की हत्या के दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि दोषी को अपनी बाकी उम्र जेल में ही बितानी होगी और जीवित रहते उसे नहीं छोड़ा जाएगा। यह मामला मध्य प्रदेश से जुड़ा है।

मप्र सरकार द्वारा दया याचिका को चार साल तक रोकने को बताया वजह

जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि दया याचिका मौत की सजा पाए किसी व्यक्ति के लिए जीवन की आशा की अंतिम किरण होती है। हर सुबह वह यह उम्मीद लेकर उठता है कि उसकी दया याचिका मंजूर हो सकती है। पीठ ने कहा कि दया याचिका पर फैसला लेने में लगभग पांच साल की देरी हुई क्योंकि राज्य सरकार के अधिकारियों ने इसे चार साल तक गृह मंत्रालय को नहीं भेजा।

जघन्य अपराध के बावजूद नहीं दी जा सकती मौत की सजा

पीठ ने कहा, जहां तक भारत सरकार या राष्ट्रपति सचिवालय की बात है तो दया याचिका से निपटने में कोई देरी नहीं हुई और दोनों जगहों से इसे तेजी से निपटाया गया। कोर्ट ने कहा, ‘मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दया याचिका को भेजने में हुई चार साल की देरी सहित उसकी अर्जी पर निर्णय करने में लगभग पांच साल की देरी हुई। इस तरह उसको 14 सालों तक जेल में रखा गया। हमारा मानना है कि दोषी द्वारा किए गए जघन्य अपराध के बावजूद इस मामले में मौत की सजा नहीं दी जा सकती है। इस तरह उसकी मृत्यु दंड की सजा उम्रकैद में बदली जाती है।’

क्या था मामला

जगदीश ने अगस्त 2005 में पत्नी और पांच बच्चों की हत्या कर दी थी। निचली अदालत ने उसे अप्रैल 2006 में मौत की सजा सुनाई थी। जून 2006 में, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उसकी सजा को बरकरार रखा था। सितंबर 2009 में शीर्ष अदालत ने उसकी अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद उसने 13 अक्टूबर, 2009 को जेल अधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति और मध्य प्रदेश के राज्यपाल को दया याचिका भेजी। लेकिन उसकी याचिका को गृह मंत्रालय को 15 अक्टूबर 2013 को भेजा गया, जिसे राष्ट्रपति ने 16 जुलाई, 2014 को खारिज कर दिया। इसके बाद जगदीश ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि दया याचिका पर फैसला करने में लगभग पांच साल की देरी हुई है। ऐसे में उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदला जाना चाहिए।

Source: Jagran.com

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