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होवरबोर्ड से इंग्लिश चैनल पार करने वाले पहले इन्वेंटर बने जपाटा, मिट्टी के तेल से चलता है फ्लाई बोर्ड

  • 40 साल के जपाटा ने दूसरी कोशिश में यह सफलता हासिल की, उन्होंने पिछले महीने भी चैनल पार करने का प्रयास किया था
  • जपाटा ने 22 मिनट में 35 किमी की उड़ान भरी, इस दौरान फ्लाईबोर्ड की रफ्तार 170 किमी प्रति घंटे तक पहुंच गई थी

Dainik Bhaskar

Aug 05, 2019, 07:48 AM IST

पेरिस. फ्रांसीसी आविष्कारक फ्रैंकी जपाटा जेट-संचालित होवरबोर्ड से इंग्लिश चैनल को पार करने में सफल रहे। पिछले महीने अपने पहले प्रयास में विफल रहने के बाद फ्रैंकी ने दूसरी कोशिश में रविवार की सुबह यह उपलब्धि हासिल की। 40 साल के जपाटा ने रविवार सुबह 6:17 बजे फ्रांस के उत्तरी तट पर संगेट से उड़ान भरी और इंग्लिश चैनल पार कर डोवर के सेंट मार्गरेट बीच पर उतरे।

25 जुलाई को भी जपाटा ने चैनल पार करने की कोशिश की थी

  1. मिट्टी तेल से चलने वाले होवरबोर्ड से उन्होंने 22 मिनट में 22 मील (35.4 किमी) की यात्रा की। जपाटा पहले जेट-स्की चैंपियन रह चुके हैं। इससे पहले उन्होंने 25 जुलाई को भी चैनल पार करने की कोशिश की थी।

  2. जपाटा ने रिपोर्टर्स से भावुक होते हुए कहा कि हमने तीन साल पहले एक मशीन बनाई थी। अब हमने इंग्लिश चैनल पार कर लिया है। यह बेहद अद्भुत है। यह ऐतिहासिक घटना है या नहीं, यह आने वाला समय बताएगा। मैं इसका फैसला नहीं कर सकता।

  3. जपाटा ने डोवर में बताया कि उड़ान के दौरान वह 170 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक पहुंच गए थे। चैनल पार करने के दौरान उनके सामने एक बड़ी चुनौती दूसरे बैकपैक में ईंधन भरने की थी। पिछले प्रयास में वे ईंधन का बैकपैक ले जाने वाले नाव तक पहुंचने से पहले ही समुद्र में गिर गए थे।

  4. इंग्लिश चैनल पार करने के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए एक बड़ी नाव के साथ ही तीन हेलिकॉप्टरों को लगाया गया था। पिछले महीने पेरिस में वार्षिक बास्तील डे परेड के दौरान जपाटा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया था, जब उन्होंने अपने फ्यूचरिस्टिक फ्लाईबोर्ड पर एक सैन्य प्रदर्शन में भाग लिया।

  5. फ्रांस की सेना ने उनसे अपने लिए इस तकनीक को विकसित करने की मांग की है। हाल में उनकी कंपनी जेड-एआईआर को  9 करोड़ 75 लाख रुपए का अनुदान दिया है। फ्रांस इंटर रेडियो के साथ एक इंटरव्यू में फ्रांसीसी रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पैली ने कहा कि फ्लाईबोर्ड कई उद्देश्यों की पूर्ति कर सकता है। यह फ्लाइंग लॉजिस्टिक प्लेटफॉर्म के रूप में या हमले के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

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Source: bhaskar.com

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