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रिहाई के इंतजार में 4 साल से टंकी में रखे 3 कछुए, डिप्टी रेंजर समेत 4 कर्मचारी करते हैं 24 घंटे निगरानी

  • चार कछुओं को बसंतपुर पुलिस ने 6 आरोपियों से 2015 में बरामद किया था, इनमें से एक की मौत हो गई
  • आरोपियों को तो कोर्ट से जमानत मिल गई, लेकिन ट्रायल जारी है, इसलिए इन्हें साक्ष्य के तौर पर रखा 
  • इनकी देखभाल का जिम्मा वन विभाग के पास, अफसर ही इनके दाना-पानी की व्यवस्था करते हैं

Dainik Bhaskar

Jul 25, 2019, 10:58 AM IST

राजनांदगांव (मोहन कुलदीप). कोर्ट की लंबी तारीखों और पेशी की वजह से आपने इंसान को सालों तक फैसले का इंतजार करते देखा होगा। लेकिन ऐसा तीन कछुओं के साथ हो रहा है। वे पिछले चार साल से मुक्त होने के इंतजार में एक टंकी में रह रहे हैं। राजनांदगांव के फॉरेस्ट डिपो में इनकी देखभाल का जिम्मा एक डिप्टी रेंजर सहित वन विभाग के 4 कर्मचारियों को दिया गया है। वे 24 घंटे इन कछुओं की निगरानी करते हैं।

तंत्र-मंत्र में होना था इनका इस्तेमाल

  1. दरअसल, इन कछुओं को बसंतपुर पुलिस ने 6 आरोपियों से 2015 में बरामद किया था। वे इनका इस्तेमाल तंत्र-मंत्र के लिए करने वाले थे। पुलिस ने रेड डाली और सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया, इनके साथ बतौर साक्ष्य इन 4 कछुओं को भी एक टंकी में रखा गया।

  2. इस मामले में आरोपियों को तो कोर्ट से जमानत मिल गई, लेकिन ट्रायल जारी है। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि कोर्ट में कभी भी इन कछुओं को बतौर साक्ष्य प्रस्तुत करना पड़ सकता है। इस वजह से इनकी देखभाल की जा रही है।
     

  3. पुलिस ने कछुओं को वन विभाग को सौंप दिया पर इनके दाना-पानी की व्यवस्था नहीं की। विशेष फंड नहीं होने की वजह से वन विभाग के अफसर ही अपनी जेब से पैसे खर्च कर इनके लिए रोज दाना-पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। रेंजर केके वर्मा ने बताया कि कछुए वन विभाग की देखरेख में हैं, इसलिए खुद ही भोजन का प्रबंधन करते हैं। टंकी का पानी रोज बदला जाता है ताकि बदबू न आए।
     

    • दरअसल, पुलिस ने चार कछुओं को आरोपियों से बरामद किया था। इनमें से एक की मौत छह महीने में हो गई। इसके लिए वन विभाग ने  बाकायदा पोस्टमार्टम कराया गया था ताकि कोई विवाद या आपत्ति होने पर मौत का कारण बता सकें। अफसरों का कहना है कि पुलिस ने जब सौंपा तब से ही उस कछुए के शरीर में चोट के निशान थे। अब तीन कछुओं की निगरानी वन अमले के लिए चुनौती बनी हुई है।
    • हालांकि, अब तक इन कछुओं को कोर्ट में पेश नहीं किया गया है, लेकिन कोर्ट के आदेश पर पेश करने की संभावना को देखते हुए इन्हें अब तक छोड़ा नहीं गया है।
  4. अभी तक आदेश नहीं मिला

    • अधिवक्ता एचबी गाजी के कहते हैं कि ऐसे मामलों में जो भी वन्य जीव आरोपियों के कब्जे से बरामद होते हैं, वे शासन के अधीन होते हैं। वन विभाग चाहे तो संरक्षित क्षेत्र में वन्य जीवों को छोड़ सकता है।
    • टीआई बसंतपुर थाना, राजेश साहू बताते हैं कि जो आरोपी पकड़े गए थे, वे जमानत पर रिहा हो चुके हैं। कछुओं के संबंध में जानकारी नहीं है। वन्य जीव होने की वजह से वन विभाग को सौंपा गया था। 
    • डीएफओ पंकज राजपूत के मुताबिक, कोर्ट में प्रकरण होने की वजह से कछुओं को छोड़ा नहीं गया। कछुओं को छोड़ने के संबंध में न्यायालय से पत्राचार किया गया था, फिलहाल इसे लेकर कोई आदेश नहीं मिला है। 

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Source: bhaskar.com

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