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एनएसई पर लिस्टेड 1300 में से 410 कंपनियों ने काम शुरू किया, लेकिन मांग में कमी बड़ी परेशानी

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्टेड एक तिहाई नॉन-सर्विस मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने फिर से काम शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी मांग में कमी है और कई तरह के व्यवधान भी जारी हैं। एनएसई पर लिस्टेड कंपनियों द्वारा फाइलिंग आंकड़ों से पता चलता है कि 1300 में से 410 कंपनियों ने फिर से काम शुरू कर दिया है।

जिन नॉन-सर्विस कंपनियों ने काम शुरू किया है उनमें आईटीसी, मारुति सुजुकी, हीरो मोटोकॉर्प, एशियन पेंट्स, टाटा मोटर्स, अशोक लेलैंड, व्हर्लपूल इंडिया, बॉश, वेलस्पन और टाटा केमिकल्स जैसी कई कंपनियां शामिल हैं। सीमेंट, टायर, केमिकल और दवा कंपनियों ने 20 अप्रैल से 22 मई के बीच आंशिक रूप से कारोबार फिर से शुरू किया। माल यातायात का आवागमन भी आसान कर दिया है।

कॉर्पोरेट अधिकारियों ने कहा कि उनकी टीम बाजार की मांग की निगरानी कर रही थी। टाटा केमिकल्स के स्पोकपर्सन ने कहा, "अब तक मिली लर्निंग से हमें अपनी परिचालन क्षमताओं में सुधार करने और अपनी विकास रणनीति की समीक्षा करने का अवसर मिला है। हम रेलवे के माध्यम से उत्पादों के निर्बाध वितरण को सुनिश्चित करने में सक्षम थे।"

आर्थिक गतिविधियों में स्पीड आई

मिड अप्रैल से आर्थिक गतिविधियों में सुधार में कुछ संकेत मिले हैं, लेकिन पूरी तरह वसूली के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है। क्रेडिट सुइस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली की मांग जो अप्रैल के मध्य में 27% कम हो गई थी, मई में केवल 14% कम है। इसी तरह, ई-वे बिल जेनरेशन जो अप्रैल में 80% गिर गया था, अब केवल 60% नीचे है। महानगरों में यातायात की भीड़ अभी भी 15-40% है।

दूसरी तरफ, ऑटो कंपनियों ने फिर से उत्पादन शुरू कर दिया है, लेकिन वाहन पंजीकरण अभी भी 90% कमी है, क्योंकि अधिकांश डीलर ने अभी काम शुरू नहीं किया है। सीमेंट कंपनियां 50% क्षमता पर काम कर रही हैं, क्योंकि डिमांड अनिश्चितता के कारण डीलर स्टॉक करने को तैयार नहीं हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में सीमेंट की बिक्री सामान्य से 65-70% अधिक है।

विश्लेषकों ने कहा कि नई दिल्ली में घरेलू इस्पात की कीमत में इस सप्ताह 1,000 रुपए प्रति टन की कमी आई है, क्योंकि इंडस्ट्री को कई तरह के मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

एडलवीस सिक्योरिटीज के एनालिस्ट अमित दीक्षित ने कहा, "हमारे चैनल चेक से संकेत मिलता है कि लेबर की अनुपस्थिति के कारण व्यापार अभी भी सामान्य स्तर के लगभग 15-20% पर है। साथ ही, पेमेंट साइकिल में व्यवधान और अनिश्चितता की मांग है।"

केलॉग साउथ एशिया के एमडी मोहित आनंद ने कहा कि लॉकडाउन में चुनौतियां, लेबर, ट्रांसपोर्ट और परमिशन, सभी शहरों और राज्य के लिए हैं। उन्होंने कहा, "हमने अपनी सुविधाओं को फिर से खोल दिया है और अब मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन को सामान्य स्तर तक वापस लाने के लिए तैयार हैं।"

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के एमडी संजीव प्रसाद ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें ग्रीन और ऑरेंज जोन को अधिक आर्थिक गतिविधियों के लिए खोल देंगी।"

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A third of NSE manufacturing companies back at work

Source: bhaskar.com

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